उत्तराखण्ड

उत्तरकाशी में सुरंग के भीतर फंसे 40 मजदूरों की सकुशल वापसी के लिए सीएम धामी पहुंचे टनल के पास……………. फंसे मजदूरों को इस प्रकार दिया गया भोजन……….. इस तकनीक से हुई उनसे वार्ता….………….

सिलक्यारा, सुरंग में फंसे श्रमिकों को सकुशल बाहर निकालना पहली प्राथमिकता :–
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री धामी ने घटनास्थल पर पंहुच कर अधिकारियों के साथ बचाव और राहत कार्यों का लिया जायजा व की समीक्षा

उत्तरकाशी/सिलक्यारा, 13 नवम्बर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग में फंसे लोगों को सकुशल बाहर निकालना हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। घटना के बाद से ही लगातार अधिकारियों से अपडेट ले रहे मुख्यमंत्री ने आज पूर्वाह्न सिलक्यारा पहुंचकर मौके का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बचाव एवं राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राहत एवं बचाव कार्यों की अपडेट ले रहे हैं.. !
प्रधानमंत्री ने आवश्यकता पड़ने पर पूर्ण सहायता करने का आश्वासन भी मुख्यमंत्री धामी को दिया !

विदित हो, गत 12 नवम्बर को जनपद उत्तरकाशी के यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग धरासू एवं बड़कोट के मध्य सिल्क्यारा के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन टनल लगभग 4531 मी0 की सुरंग जिसका कि सिल्कयारा की तरफ से 2340 मी0 तथा बड़कोट की तरफ से 1750 मी0 निर्माण हो चुका है, में प्रातः 8:45 पर सिलक्यारा की तरफ से अचानक भू-धसाव होने की सूचना प्राप्त हुई है। प्राप्त सूचना के अनुसार सिल्कियारा की तरफ से लगभग 270 मीटर अन्दर लगभग 30 मीटर क्षेत्र में ऊपर से मलबा सुरंग में गिरने के कारण 40 व्यक्ति फंसे हुए है। एन.एच.आई.डी.सी.एल. द्वारा प्राप्त सूचना के अनुसार उक्त फंसे मजदूर / कार्मिकों में उत्तराखण्ड – 02, हिमाचल- 01, बिहार- 04, पं0 बंगाल- 03, उत्तरप्रदेश – 08, उड़ीसा के 05, झारखण्ड – 15 एवं असम- 02 मजदूर होना बताया गया है।

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टनल के अंदर अस्थायी रूप से ऑक्सीजन सप्लाई कम्प्रेशर के द्वारा वाटर पाईप लाईन के माध्यम से लगातार किया गया है तथा 200 एम.एम. पाईप के माध्यम से भूस्खलन एरिया में वेंटीलेशन सुनिश्चित किया गया है। उक्त के अतिरिक्त शॉर्ट क्रिट एक्पोज सरफिस का शॉर्ट क्रिट के माध्यम से स्टेबलाइजेशन किया जा रहा है

स्वास्थ्य विभाग की टीमें विशेषज्ञ व उचित औषधि उपकरण, एम्बुलेंस सहित टनल गेट पर तैनात हैं। किसी भी विपरीत परिस्थिति में निकटवर्ती जनपदों के चिकित्सालयों एवं एम्स ऋषिकेश को हाई अलर्ट पर रखा गया है। तथा ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति हेतु पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेण्डर का भण्डारण किया गया है।

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उक्त के अतिरिक्त लखवाड़ हाईड्रो प्रोजेक्ट से एक हॉरीजॉटल ड्रिल मशीन भी घटना स्थल पर कार्यरत है तथा कोलेप्स मैटेरियल को भी एक्सीवेटर तथा फ्रंट लोडर के माध्यम से लगातार हटाया जा रहा है। चूंकि उक्त स्थल पर लगातार मलबे का आना जारी है। उक्त हेतु शॉर्ट क्रिट का कार्य गतिमान है। एयर पाइप लाईन के माध्यम से फंसे हुये व्यक्तियों को खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है तथा वॉकी-टॉकी के माध्यम से फंसे हुए व्यक्तियों से बात हो रही है सभी 40 व्यक्ति सुरंग के अंदर सुरक्षित बताये गये हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण पूरे खोज एवं बचाव ऑपरेशन को 24×7 मॉनिटर कर रहे हैं।

जिलाधिकारी उत्तरकाशी, एन.एच. आई.डी. सी. एल. के मुख्य प्रबन्धक, मुख्य विकास अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी उप जिलाधिकारी डुण्डा / बड़कोट एवं राजस्व टीम मौके पर मौजूद है। पुलिस अधीक्षक तथा एस०एच०ओ० सहित स्थानीय पुलिस 35 व्यक्ति, एन०डी०आर०एफ०-35 व्यक्ति, एस०डी०आर०एफ0-24 व्यक्ति, पुलिस वायरलेस -06 व्यक्ति, स्वास्थ्य विभाग की टीम (04 डॉक्टर, 11 एम्बुलेंस तथा 02 स्वास्थ्य टीम), रेल विकास निगम लि0-02 व्यक्ति, आई०टी०बी०पी० 12वी वाहिनी तथा 35वी वाहिनी- 50 व्यक्ति लगभग कुल – 164 कार्मिक राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुये हैं। जनपद तथा राज्य स्तर पर आई०आर०एस० सक्रिय हैं। –

  • लोक निर्माण विभाग के द्वारा 02 अतिरिक्त जे०सी०बी० मशीन भेजी गयी हैं। लो०नि०वि० के सहयोग से घटना स्थल से 05 किमी0 की दूरी पर स्थान स्यालना के समीप अस्थायी हैलीपैड निर्माण किया जा चुका है। चिन्यालीसौड़ हैलीपैड भी राहत कार्यों हेतु एक्टिव / चिन्हित किया गया है।
  • यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग धरासू एवं बड़कोट के मध्य सिलक्यारा के समीप निर्माणाधीन टनल भूस्खलन के अध्ययन व कारणों की जांच एवं तद्संबंधित आख्या तैयार कर उपलब्ध करवाये जाने हेतु निदेशक, उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केन्द्र की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति का गठन किया गया है जिसमें वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्था, केन्द्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग, भूगर्म एवं सनिकर्म इकाई तथा राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के विशेषज्ञ सम्मिलित हैं जो घटना स्थल पर पहुंच गये हैं तथा उक्त घटनास्थल का निरीक्षण का रहे हैं।
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