लालकुआं।
पहली बार ट्रेन में सफर करना बिंदुखत्ता के दो भाइयों के लिए ऐसा अनुभव बन गया, जिसे वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। पहाड़ से अपनी 82 वर्षीय बीमार मां को इलाज के लिए भोजीपुरा स्थित राममूर्ति अस्पताल ले जा रहे दोनों भाई ट्रेन की हड़बड़ाहट में इतने घबरा गए कि मां ट्रेन में ही छूट गई और दोनों अलग-अलग स्टेशनों पर उतर गए।
हालांकि, कहानी का सुखद अंत हुआ—जीआरपी पुलिस की सतर्कता से वृद्ध मां को बदायूं स्टेशन पर सकुशल उतारकर परिवार को सौंप दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
बिंदुखत्ता के गांधीनगर निवासी दरबान सिंह और उनके भाई कृपाल सिंह अपनी 82 वर्षीय मां भवानी देवी को इलाज के लिए लेकर नगला रेलवे स्टेशन पहुंचे। जैसे ही लालकुआं से कासगंज जाने वाली पैसेंजर ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी, दोनों भाइयों ने पहले मां को ट्रेन में बैठाया।
इसी बीच दरबान टिकट लेने के लिए नीचे उतर गया। तभी ट्रेन चलने लगी। मां के साथ बैठे कृपाल सिंह घबराकर बड़े भाई को देखने नीचे उतरे, लेकिन ट्रेन ने रफ्तार पकड़ ली। कृपाल किसी तरह आखिरी डिब्बे में चढ़ गए, पर दरबान टिकट लेकर लौट नहीं सके और ट्रेन छूट गई।
अब स्थिति ऐसी थी कि—
एक भाई पंतनगर स्टेशन पर उतर गया,
दूसरा भोजीपुरा स्टेशन पर,
और 82 वर्षीय मां ट्रेन में अकेली सफर करती रह गईं!
परिवार में मचा हड़कंप
दोनों भाइयों के मोबाइल पर बातचीत हुई तो परिवार में हड़कंप मच गया। तुरंत दरबान सिंह लालकुआं जीआरपी चौकी पहुंचे और पूरी घटना बताई। पुलिस ने बिना देर किए कासगंज तक के सभी स्टेशनों को सूचना दे दी।
पुलिस बनी फरिश्ता
आखिरकार बदायूं रेलवे स्टेशन पर जीआरपी पुलिस ने वृद्ध मां भवानी देवी को सकुशल उतार लिया। इसके बाद उन्हें लालकुआं जीआरपी चौकी लाया गया और परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
मां को सुरक्षित पाकर परिवार ने राहत की सांस ली और पुलिस का आभार जताया।
जीआरपी चौकी प्रभारी सतपाल सिंह ने बताया कि दोनों भाई पहली बार ट्रेन में बैठे थे। घबराहट और अनुभव की कमी के कारण यह घटना हुई, लेकिन पुलिस की तत्परता से वृद्धा को सुरक्षित परिवार को सौंप दिया गया।
फोटो परिचय: लालकुआं जीआरपी के पुलिसकर्मी वृद्धा को परिजनों के सुपुर्द करते हुए।





