उत्तराखण्ड

बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम केवल एफआरए से बनाये…मुख्यमंत्री को वन अधिकार समिति का स्पष्ट संदेश…

लालकुआं। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत वनग्राम बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की लंबित मांग को लेकर वन अधिकार समिति व पूर्व सैनिक संगठन बिंदुखत्ता ने मुख्यमंत्री उत्तराखंड के नाम दो सूत्री मांग पत्र तहसीलदार पूजा शर्मा लालकुआं को सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय के बाहर एकत्र होकर अपनी मांगों को मुखर किया।

समिति व पूर्व सैनिक संगठन ने दो सूत्री मांग पत्र में कहा है कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत जनपद नैनीताल के वन ग्राम बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने हेतु जिला स्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा 19 जून 2024 को सर्वसम्मति से पारित दावे के आधार पर तत्काल राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी की जाए। इस संबंध में 21 अक्टूबर 2024 को मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राजस्व सचिव को अधिसूचना जारी करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

समिति ने दूसरी मांग में कहा कि बिंदुखत्ता के प्रकरण में माननीय सुप्रीम कोर्ट जाने जैसी कार्यवाही से परहेज किया जाए। यदि इसके बावजूद माननीय सुप्रीम कोर्ट में प्रकरण ले जाया जाता है और भविष्य में बिंदुखत्ता के विरुद्ध कोई प्रतिकूल निर्णय आता है, तो उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी वर्तमान विधायक, सांसद एवं उत्तराखण्ड सरकार की मानी जाएगी।

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समिति ने महत्वपूर्ण तथ्य पेश करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में भी राज्य सरकार ने बिंदुखत्ता सहित 63 गोठ खत्तों को राजस्व ग्राम घोषित करने का प्रस्ताव कैबिनेट से पास कर केंद्र सरकार को भेजा था, जो सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। तब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से यह कहते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया था कि वर्तमान में उड़ीसा राज्य को छोड़कर किसी भी राज्य का प्रस्ताव मंजूर नहीं किया जाएगा। इसी आदेश के आधार पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 4 दिसंबर 2006 को उत्तराखंड के नैनीताल, उधम सिंह नगर और चम्पावत जिलों में वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने पर रोक लगा दी थी।

समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी ने बताया कि इसी सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण पूर्व में वर्ष 2009, 2011 और 2024 में की गई मुख्यमंत्री घोषणाओं को भी विलोपित कर दिया गया। हर बार यही कारण दिया गया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम के संबंध में रोक लगा रखी है।

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समिति के संरक्षक बसंत पांडे कहा कि अब फिर से उसी रास्ते पर चलने की योजना बनाना बिंदुखत्ता की जनता के साथ अन्याय होगा। उन्होंने तर्क दिया कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के आने के बाद देशभर में लगभग 1600 वन ग्रामों को बिना वन भूमि अनारक्षण के राजस्व ग्राम बनाया जा चुका है और 3 करोड़ 38 लाख हेक्टेयर से अधिक वन भूमि राजस्व भूमि में परिवर्तित हो चुकी है। उत्तराखंड के हरिद्वार व नैनीताल जिले में भी 06 ऐसे ग्राम हैं, जिन्हें इसी अधिनियम के तहत राजस्व ग्राम का दर्जा दिया गया।

हाल ही में 8 सितंबर 2025 को प्रभागीय वनाधिकारी तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी ने भी स्पष्ट किया कि बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की कार्यवाही समाज कल्याण विभाग द्वारा की जानी है। वहीं 25 सितंबर 2025 को मुख्य सचिव की बैठक में भी यह निर्णय लिया गया कि इस मामले में जिलाधिकारी/जिला स्तरीय वनाधिकार समिति ही निर्णय लेने के लिए सक्षम है।

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पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू ने कहा, “हमारे पूर्वजों ने इस भूमि पर बसकर जंगलों को आबाद किया था। हमें राजस्व ग्राम का दर्जा मिलना हमारा कानूनी अधिकार है।”

वन अधिकार समिति के सदस्य उमेश भट्ट ने कहा कि बिंदुखत्ता की जनता दशकों से इस अधिसूचना का इंतजार कर रही है और अब किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस अवसर पर ज्ञापन देने वालों में वन अधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, बसंत पांडे, उमेश भट्ट, इंद्र सिंह पनेरी, कैप्टन दलवीर कफोला, चंचल सिंह कोरंगा, नंदन बोरा, संध्या डालाकोटी, कविराज धामी, रमेश जोशी, केडी मिश्रा, एडवोकेट बलवंत बिष्ट, कैप्टन हीरा सिंह बिष्ट, बलवंत संबल, आनंद गोपाल सिंह बिष्ट, दीपक पांडे, नवीन जोशी, रज्जी बिष्ट, गौरव जोशी, रमेश कार्की, दया कृष्ण जोशी, दीपक नेगी, रेखा कार्की, दीपक जोशी, मोहनी मेहता, भूपेश जोशी, गोविंद सिंह बोरा सहित चार दर्जन से अधिक पूर्व सैनिक और वन अधिकार समिति के सदस्य उपस्थित थे।

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