तीनपानी फ्लाईओवर पर काल बनकर दौड़ी बेकाबू कार, तीन नाबालिगों की मौत से परिवारों में मचा कोहराम; चौथी किशोरी का अस्पताल में हो रहा उपचार
लालकुआं। हल्द्वानी के निकट तीनपानी फ्लाईओवर पर शुक्रवार शाम हुए भीषण सड़क हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। तेज रफ्तार कार के अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराने और पलटने से घायल तीसरे किशोर प्रांजल माउड़ी ने भी शनिवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे में पहले ही दो किशोरों की मौत हो चुकी थी। महज 16 और 17 वर्ष की उम्र में तीन किशोरों की असमय मौत से उनके घरों में कोहराम मचा है। जिन घरों में बच्चों के भविष्य को लेकर सपने संजोए जा रहे थे, वहां अब अपनों को खोने का असहनीय दर्द और मातम पसरा हुआ है। हादसे में घायल किशोरी का उपचार जारी है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम कार संख्या यूके 02 ए 2544 में चार नाबालिग बच्चे सवार थे। तीनपानी फ्लाईओवर पर पहुंचते ही कार अनियंत्रित हो गई। कार सड़क पर काफी दूर तक घिसटती चली गई और फिर डिवाइडर से जोरदार टक्कर के बाद पलट गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार बच्चे अंदर फंस गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोग मदद के लिए दौड़े और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से कार में फंसे बच्चों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने दो किशोरों को मृत घोषित कर दिया था।
मृतकों में ऊंचापुल, हल्द्वानी निवासी 16 वर्षीय उत्कर्ष धपोला पुत्र डॉ. शैलेन्द्र सिंह धपोला तथा देवलचौड़ निवासी 17 वर्षीय सिद्धांत पाठक पुत्र रवि मोहन पाठक शामिल थे। दोनों की शुक्रवार शाम ही मौत हो गई थी। वहीं हादसे में गंभीर रूप से घायल श्याम विहार, भाजपा कार्यालय के निकट निवासी 16 वर्षीय प्रांजल माउड़ी पुत्र डॉ. प्रेम सिंह माउड़ी का अस्पताल में उपचार चल रहा था। शनिवार को उसने भी जिंदगी की जंग हार दी। प्रांजल कोचिंग में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। हल्द्वानी कोतवाली पुलिस के अनुसार, तीसरे किशोर का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हादसे में घायल 17 वर्षीय किशोरी का उपचार जारी है।
इस हादसे ने तीन परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी। उत्कर्ष के पिता डॉ. शैलेन्द्र सिंह धपोला भीमताल स्थित डायट में शिक्षक के पद पर तैनात हैं। उत्कर्ष उनका इकलौता बेटा था। इकलौते बेटे को खोने का दर्द परिवार के लिए असहनीय है। वहीं, सिद्धांत के पिता रवि मोहन पाठक रानीखेत में इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। तीसरे किशोर प्रांजल के पिता डॉ. प्रेम सिंह माउड़ी भी भीमताल डायट में तैनात हैं। तीनों परिवारों ने अपने बच्चों के भविष्य को लेकर जो सपने देखे थे, वे एक ही हादसे में बिखर गए।
हादसे का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कार में सवार चारों बच्चे नाबालिग थे। तीन किशोरों की मौत और एक किशोरी के घायल होने की घटना ने अभिभावकों की जिम्मेदारी, नाबालिगों के वाहन चलाने और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दुर्घटना के समय कार कौन चला रहा था, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस हादसे के कारणों और वाहन चालक की पहचान की जांच कर रही है।
तीनपानी फ्लाईओवर पर हुआ यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही के संभावित खतरों की ओर ध्यान खींचता है। घटना के बाद हाईवे पर गति नियंत्रण, यातायात निगरानी और दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाने की जरूरत भी रेखांकित हुई है। तीन किशोरों की मौत ने कई परिवारों को उम्रभर का दर्द दे दिया है। यह हादसा पीछे छोड़ गया है कई अनुत्तरित सवाल और उन माता-पिता की सूनी आंखें, जिन्होंने अपने बच्चों को भविष्य के सपनों के साथ बड़ा किया था।



