उत्तराखण्ड

लालकुआं में गौला रोड रेलवे क्रॉसिंग पर बनेगा फ्लाईओवर, शासन ने दी पहली मंजूरी

52.31 लाख के प्रस्ताव के सापेक्ष 6.92 लाख रुपये की स्वीकृति, आरओबी निर्माण से पहले होगा फिजिबिलिटी स्टडी का काम

लालकुआं। लालकुआं में गौला रोड स्थित रेलवे क्रॉसिंग गेट नंबर-50 पर लगने वाले जाम से निजात दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत यहां रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए उत्तराखंड शासन ने फिजिबिलिटी स्टडी (व्यवहार्यता अध्ययन) के प्रथम चरण की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। शासन के इस आदेश से क्षेत्र में फ्लाईओवर निर्माण की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।उत्तराखंड शासन के लोक निर्माण अनुभाग-2 की ओर से 24 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, मुख्यमंत्री घोषणा संख्या 400/2025 के अंतर्गत जनपद नैनीताल में लालकुआं कार रोड स्थित गौला गेट रेलवे क्रॉसिंग गेट नंबर-50 (स्पेशल) पर आरओबी निर्माण से संबंधित फिजिबिलिटी स्टडी के लिए 6 लाख 92 हजार रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई है। यह आदेश अपर सचिव महावीर सिंह चौहान की ओर से प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग, उत्तराखंड को जारी किया गया है।शासन को इस कार्य के लिए 52.31 लाख रुपये का आगणन उपलब्ध कराया गया था, जिसका परीक्षण करने के बाद 6.92 लाख रुपये की धनराशि को औचित्यपूर्ण मानते हुए स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रस्तावित परियोजना में 180 मीटर लंबे रोड ओवर ब्रिज के साथ 900 मीटर एप्रोच रोड का निर्माण शामिल है। हालांकि, फिलहाल स्वीकृति फ्लाईओवर के निर्माण की नहीं, बल्कि उसके निर्माण से पूर्व आवश्यक व्यवहार्यता अध्ययन के लिए दी गई है।शासनादेश में चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में व्यय के लिए प्रारंभिक तौर पर 10 हजार रुपये की धनराशि लोक निर्माण विभाग के निवर्तन में रखे जाने का भी उल्लेख है। फिजिबिलिटी स्टडी के माध्यम से प्रस्तावित आरओबी की व्यवहार्यता का आकलन किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी।गौला रोड रेलवे क्रॉसिंग लालकुआं के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। रेलवे फाटक बंद होने के दौरान वाहनों को रुकना पड़ता है, जिससे यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में यहां आरओबी का निर्माण होने से भविष्य में जाम की समस्या कम होने और आवागमन सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें फिजिबिलिटी स्टडी पूरी होने और निर्माण कार्य की अगली मंजूरी पर टिकी हैं।

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