उत्तराखण्ड

श्रीमद्भागवत साक्षात सच्चिदानंद परमात्मा का स्वरूप : कपिल देव महाराज

लालकुआं। दुम्का बंगर बच्चीधर्मा स्थित प्राचीन भूमिया मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। कथा व्यास आचार्य कपिल देव महाराज ने श्रीमद्भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सच्चिदानंद स्वरूप परमात्मा को जानना ही श्रीमद्भागवत को समझना है, क्योंकि श्रीमद्भागवत साक्षात परमात्मा का ही स्वरूप है।
उन्होंने कहा कि सत, चित और आनंद लौकिक एवं अलौकिक जगत के सार हैं। इन तीनों तत्वों को समझ लेना ही श्रीमद्भागवत के वास्तविक भाव को जानना है। जिसने श्रीमद्भागवत के मर्म को समझ लिया, उसके लिए जीवन में कुछ भी जानना शेष नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप ही नहीं, बल्कि संत महात्माओं की महिमा और उनकी आध्यात्मिक परंपरा का भी अद्भुत ग्रंथ है।
कथा व्यास ने बताया कि श्रीमद्भागवत की कथा नैमिषारण्य में 88 हजार संत-महात्माओं की आध्यात्मिक जिज्ञासाओं से आरंभ होकर महर्षि वेदव्यास, देवर्षि नारद और शुकदेव मुनि की परंपरा से आगे बढ़ती है। इसके पश्चात उन्होंने ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद की भक्ति, भगवान वामन अवतार तथा धुंधकारी की कथा का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालु भक्तिमय वातावरण में डूबे रहे।
देर शाम कथा समापन के पश्चात आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर मुख्य यजमान बुद्धि बल्लभ नैनवाल, मंदिर कमेटी अध्यक्ष बंशीधर भट्ट, चंद्रशेखर भट्ट, मंदिर के पुजारी पंडित गोलू भट्ट, ललित धरियाल, कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख कमल भंडारी, केवलानंद फुलारा, रमेश चंद्र भट्ट, कैलाश चंद्र फुलारा, महेश सल्वासी, पीयूष भट्ट, बसंत भट्ट, जगदीश चंद्र भट्ट और गोपाल भट्ट सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
फोटो परिचय: बच्चीधर्मा स्थित प्राचीन भूमिया मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस श्रद्धालुओं को प्रवचन देते कथा व्यास आचार्य कपिल देव महाराज।

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