लालकुआं। पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के चलते गौला नदी इन दिनों उफान पर है। बिंदुखत्ता क्षेत्र में नदी के तेज बहाव से लगातार हो रहे भू-कटाव ने ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नदी का कटाव गांव की ओर बढ़ने से कई एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि गौला में समा चुकी है, जबकि दर्जनों किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होने की बात सामने आ रही है।
ग्रामीणों की जमीन को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने शनिवार को गौला नदी में पोकलैंड मशीन उतारकर नदी का डायवर्जन करने का काम शुरू किया। लेकिन जैसे ही मशीन से काम शुरू हुआ, तराई पूर्वी वन प्रभाग की गौला रेंज के करीब आधा दर्जन वनकर्मी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने पोकलैंड का काम रुकवा दिया। वनकर्मियों ने सिंचाई विभाग से नदी में काम करने की अनुमति संबंधी पत्रावली दिखाने को कहा। अनुमति पत्र मौके पर उपलब्ध नहीं होने पर वन विभाग ने मशीन को नदी से बाहर निकलवा दिया।
वन विभाग की कार्रवाई से ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों ग्रामीण एकत्र हो गए और आक्रोशित ग्रामीणों ने करीब आधा दर्जन वनकर्मियों को बंधक बना लिया। ग्रामीणों ने वनकर्मियों को गांव से बाहर नहीं निकलने दिया। सुबह से शाम तक चले इस घटनाक्रम के बाद जब सिंचाई विभाग की अनुमति से संबंधित पत्र मौके पर पहुंचा, तब ग्रामीणों ने वनकर्मियों को जाने दिया।
ग्रामीण हरीश पांडे ने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग बिंदुखत्ता की गंभीर समस्या की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौला नदी के कटाव से किसानों की उपजाऊ जमीन लगातार नदी में समाती जा रही है, लेकिन अब तक नदी के किनारे पर्याप्त तटबंध नहीं बनाए गए हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इधर, गौला रेंज के वन क्षेत्राधिकारी चंदन सिंह अधिकारी ने बताया कि सिंचाई विभाग ने गौला नदी में पोकलैंड मशीन तो उतार दी, लेकिन कार्य के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। सूचना मिलने पर वनकर्मी मौके पर पहुंचे और काम रुकवा दिया। इसी दौरान ग्रामीणों ने वनकर्मियों को बंधक बना लिया।
बंधक बनाए गए वनकर्मियों में वन दरोगा सुखबीर कौर, दीप आर्य, भुवन फर्त्याल, जमुना प्रसाद जोशी और अरुण कुमार शाह सहित अन्य वनकर्मी शामिल थे।
बाद में वन विभाग से अनुमति मिलने के बाद देर शाम पोकलैंड मशीन को दोबारा नदी में उतारा गया, लेकिन अंधेरा होने के कारण काम रोकना पड़ा। अब रविवार को पोकलैंड मशीन से नदी का डायवर्जन कार्य दोबारा शुरू कराया जाएगा।
ग्रामीणों के अनुसार इंदिरा नगर क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक किसानों की भूमि अब तक गौला नदी में समा चुकी है। किसानों का कहना है कि यदि नदी के कटाव को तत्काल नहीं रोका गया तो आने वाले समय में और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नदी की भेंट चढ़ सकती है।
फोटो परिचय- गौला नदी में वन विभाग से नोकझोक करते ग्रामीण




