हल्द्वानी। एमबी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित तीन दिवसीय जौहार महोत्सव में रविवार को सचिव मुख्यमंत्री एवं कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने जौहार घाटी की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि जौहार की संस्कृति उत्तराखंड की आत्मा है।
अपने संबोधन में आयुक्त दीपक रावत ने कहा कि शौका जनजाति के लोगों ने विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और पहचान को जिस तरह संजोकर रखा है, वह सभी के लिए प्रेरणादायक है। ऐसे महोत्सव हमारी लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और हस्तशिल्प को बाजार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन पलायन रोकने और स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसर बढ़ाने में भी सहायक हैं। राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्रों के विकास और उनकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
महोत्सव में मुनस्यारी, धारचूला और मिलम क्षेत्र से पहुंचे शौका जनजाति के कलाकारों ने पारंपरिक छोलिया, झोड़ा और चांचरी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, जौहार के प्रसिद्ध ऊनी उत्पाद थुलमा, पंखी, कालीन, स्थानीय जड़ी-बूटियों और जैविक उत्पादों के स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से लगाए गए स्टॉलों पर भट्ट के डुबके, मंडुवे की रोटी और भांग की चटनी जैसे पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का भी लोगों ने खूब आनंद लिया।
कार्यक्रम में सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी एपी बाजपेई, जिला विकास अधिकारी, महोत्सव संयोजक मंडल के सदस्य, गणमान्य नागरिक, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आयुक्त दीपक रावत ने महोत्सव परिसर में लगे विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और आयोजकों को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।



