लालकुआं। भारतीय संस्कृति और सनातन संगीत परंपरा की दिव्यता अब सात समंदर पार तक लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसी का भावुक और प्रेरणादायी दृश्य उस समय देखने को मिला, जब इजराइल निवासी जूली जयश्री अपने गुरुजनों का आशीर्वाद लेने और ध्रुपद संगीत की गहन साधना के लिए हल्दूचौड़-लालकुआं पहुंचीं।
विदेशी धरती से भारत आई जूली जयश्री ने सुप्रसिद्ध ध्रुपद गायक डॉ. आस्था चोपड़ा एवं पंडित प्रदीप चोपड़ा से भेंट कर ध्रुपद गायन की सूक्ष्म बारीकियों को समझा तथा संगीत साधना पर विस्तृत मार्गदर्शन प्राप्त किया। गुरु-शिष्य परंपरा के इस अनूठे संगम ने उपस्थित लोगों को भारतीय संस्कृति की महानता का एहसास कराया।
बताया जा रहा है कि जूली जयश्री इससे पूर्व यहां स्थित हैड़ाखान आश्रम में प्रवास कर रही थीं। भारतीय अध्यात्म और संगीत के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा उन्हें अपने गुरु गृह हल्दूचौड़ तक खींच लाई।
उल्लेखनीय है कि डॉ. आस्था चोपड़ा एवं पंडित प्रदीप चोपड़ा, विश्वप्रसिद्ध ध्रुपद गायक पद्मश्री उमाकांत गुंडेचा एवं स्वर्गीय रमाकांत गुंडेचा के शिष्य हैं। चोपड़ा दंपत्ति वर्षों से भारतीय शास्त्रीय संगीत की गौरवशाली धरोहर को देश-विदेश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना सहित कई देशों के विद्यार्थी और संगीत प्रेमी भी ध्रुपद संगीत की शिक्षा लेने के लिए हल्दूचौड़ पहुंच चुके हैं। भारतीय संगीत की यह विश्वव्यापी पहचान क्षेत्र के लिए गर्व और सम्मान का विषय बनती जा रही है।
फोटो परिचय- इजरायल निवासी अपनी शिष्या जूली को ध्रुपद संगीत सिखाती डॉ आस्था चोपड़ा





