लालकुआं। कभी सैकड़ों श्रमिकों और उनके परिवारों की सेहत की जिम्मेदारी संभालने वाली लालकुआं की 42 वर्ष पुरानी ईएसआई डिस्पेंसरी आज खुद बदहाल व्यवस्था की शिकार बन चुकी है। वर्ष 1984 में स्थापित यह स्वास्थ्य केंद्र, जहां कभी रोजाना मरीजों की लंबी कतारें लगती थीं, अब नियमित डॉक्टर के अभाव में अपनी पहचान खोता जा रहा है। हालात इतने चिंताजनक हैं कि यहां मरीजों को इलाज के लिए पूरे सप्ताह इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि सप्ताह में केवल मंगलवार को ही डॉक्टर उपलब्ध होते हैं।
एक समय था जब इस डिस्पेंसरी में डेढ़ दर्जन से अधिक चिकित्सक एवं कर्मचारी तैनात रहते थे और प्रतिदिन 300 से 400 मरीजों की ओपीडी होती थी। आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के हजारों श्रमिक और उनके परिवार यहीं से स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करते थे। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। वर्तमान में यहां केवल आधा दर्जन कर्मचारी रह गए हैं और नियमित चिकित्सक न होने के कारण मरीजों की संख्या घटकर 50 से 70 के बीच सिमट गई है।
हर मंगलवार को हल्द्वानी से आने वाले चिकित्सक डॉ. अशोक दीवान मरीजों का उपचार करते हैं। यदि किसी कारणवश उनका अवकाश हो जाए तो मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ता है। सप्ताह के शेष छह दिनों तक डिस्पेंसरी में कर्मचारी तो मौजूद रहते हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं होने से उपचार की व्यवस्था लगभग ठप रहती है।
स्थिति को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि कभी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं के लिए पहचानी जाने वाली इस डिस्पेंसरी से दो वर्ष पूर्व सुपर स्पेशियलिटी का दर्जा भी समाप्त कर दिया गया। अब दवाइयों की आपूर्ति भी आवश्यकता के अनुरूप नहीं हो रही है, जिससे मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
इस संबंध में ईएसआई के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आकाशदीप ने दूरभाष पर बताया कि लालकुआं डिस्पेंसरी में नियमित चिकित्सक की नियुक्ति के लिए उच्चाधिकारियों से वार्ता की जाएगी और समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रुद्रपुर में ईएसआई अस्पताल शुरू होने के बाद आसपास की डिस्पेंसरियों का रेफरल सिस्टम समाप्त कर दिया गया है तथा अब मरीजों के दूसरे चरण का उपचार सीधे रुद्रपुर ईएसआई अस्पताल में किया जाता है।
स्थानीय श्रमिकों और क्षेत्रवासियों का कहना है कि लालकुआं जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में ईएसआई डिस्पेंसरी की यह बदहाल स्थिति चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यदि जल्द नियमित डॉक्टर की तैनाती और पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई, तो लाखों रुपये की लागत से बनी यह सरकारी स्वास्थ्य सुविधा केवल एक इमारत बनकर रह जाएगी।
फोटो परिचय- लाल कुआं वार्ड नंबर 2 में स्थित ईएसआई हॉस्पिटल





